मार्च महीने की शुरूआत होते हीं आने कभी गौर किया है कि विकास के कार्य अधिक होते हैं। यकिन न हो तो मार्च आते हीं आप जिधर निकल जाइयेगा उधर हीं आपको विकास की गंगा बहती दिखाई पडेगी।
मार्च का महीना आते हीं छोटे बडे हर कस्बों में सरकारी विकास कार्यो की झडी लग जाती है। क्या मार्च का महीना विकास का महीना है। अगर नही ंतो मार्च में हीं विकास के कार्यो में बिजली के जैसा रफ्तार क्यों आ जाता है। सरकारी कर्मी मार्च के महीने में ही अपने विभाग में बचे हुए पैसों को खर्च करने के होड में क्यों लग जाते हैं।
आखिर एैसा क्यों होता है कि महीनों से कुंभकणी नींद सोये सरकारी अधिकारी मार्च आते हीं अचानक नींद से उठ कर विकास के कार्य अधिक से अधिक करने में जुट जाते हैं।
आइये आपको बताते हैं कि एैसा क्यों होता है। महीनों से सरकारी पैसा दबाये बैठे सरकारी बाबुओं को जब साल भर सरकार के इन पैसों को हजम करने के लिए हाजमें की कोई गोली नहीं मिलती तो वे सरकार की फटकार से बचने के लिए जल्द से जल्द इन पैसों को खत्म करने में जुट जाते हैं। ताकि पैसा सरकार को वापस न करना पडे और नये साल के लिए उन्हे फिर से उतना हीं पैसा सरकार के द्वारा मिल जाये। और फिर से साल भर ये बाबु कुबेर बने रहे।
अब तो आपके समझ में आ गया होगा कि मार्च विकास का नहीं लुट का महीना है। विकास के नाम पर लुट जिसमें हमारा झारखंड पुरे देश में सर्वोच स्थान रखता है।
ashish shastri simdega 9334346611
मार्च का महीना आते हीं छोटे बडे हर कस्बों में सरकारी विकास कार्यो की झडी लग जाती है। क्या मार्च का महीना विकास का महीना है। अगर नही ंतो मार्च में हीं विकास के कार्यो में बिजली के जैसा रफ्तार क्यों आ जाता है। सरकारी कर्मी मार्च के महीने में ही अपने विभाग में बचे हुए पैसों को खर्च करने के होड में क्यों लग जाते हैं।
आखिर एैसा क्यों होता है कि महीनों से कुंभकणी नींद सोये सरकारी अधिकारी मार्च आते हीं अचानक नींद से उठ कर विकास के कार्य अधिक से अधिक करने में जुट जाते हैं।
आइये आपको बताते हैं कि एैसा क्यों होता है। महीनों से सरकारी पैसा दबाये बैठे सरकारी बाबुओं को जब साल भर सरकार के इन पैसों को हजम करने के लिए हाजमें की कोई गोली नहीं मिलती तो वे सरकार की फटकार से बचने के लिए जल्द से जल्द इन पैसों को खत्म करने में जुट जाते हैं। ताकि पैसा सरकार को वापस न करना पडे और नये साल के लिए उन्हे फिर से उतना हीं पैसा सरकार के द्वारा मिल जाये। और फिर से साल भर ये बाबु कुबेर बने रहे।
अब तो आपके समझ में आ गया होगा कि मार्च विकास का नहीं लुट का महीना है। विकास के नाम पर लुट जिसमें हमारा झारखंड पुरे देश में सर्वोच स्थान रखता है।
ashish shastri simdega 9334346611
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें