मानव तस्करी यानी मनुश्य का सौदा। समाज और सरकारी तंत्र पर एक कलंक है। कई सरकारी तंत्र और निजी संस्थान आज मानव तस्करी को रोकने का प्रयास कर रही है। बावजुद इसके आज भी धडक्कले से मानव तस्करी का कारोबार फल फुल रहा है। मानव तस्करों के दलाल सिमडेगा जैसे आदिवासी बहुल जिलों में आज भी काफी तादात में सक्रिय है। जो जोंक की तरह चिपक कर यहां की भोली भाली बच्चियों बहला कर ले जाते है, और इनका सौदा महानगरों में कर देते है।
सिमडेगा के समाजसेवी और जनप्रतिनीधियों का भी मानना है कि सिमडेगा से मानव तस्करी काफी तदात में होती है। वे इसके लिए विकास की धीमी है। हालाकि पंचायत चुनाव के बाद चुन कर आये जनप्रतिनीधी अब मानव तस्करी में अंकुष लगा लेने का भी दावा करते हैं।
जिला प्रशासन भी मानव तस्करी के बहुतायत होने से इंकार नहीं करता है। वहीं पुलिस का भी मानना है कि सिमडेगा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों से मानव तस्करी की समस्या ज्यादा है। इसका मुख्य कारण गरीबी है। पुलिस का कहना है कि मानव तस्करी के बहुत से मामलों में बच्चियों को देह व्यपार जैसे घंधे में भी लगा दिया जाता है।
पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामले प्रकाश में तो आते हैं। लेकिन दिल्ली जैसे महानगरों में पुलिस केस बनता है। सिमडेगा पुलिस का कहना है कि दिल्ली और नोएडा पुलिस इन मामलों में उनका सहयोग नहीं करती है। यहीं कारण है कि सिमडेगा की बेटियों पर हुए शोषण के खिलाफ यहां की पुलिस कुछ कर नहीं पाती है। सिमडेगा एसपी का कहना है कि अगर दिल्ली और नोएडा पुलिस उनकी मदद करे तब ऐसे मामलों पर अंकुश लग सकता है।
मानव तस्करी के खिलाफ काम कर रहीं एक किसान विकास केन्द्र नामक संस्थान का कहना है कि इन क्षेत्रों से मानव तस्करी बहुत ज्यादा तादात में होता है। उनका संस्थान दिल्ल्ी जैसे महानगरों से शोषण का शिकार हो रहे झारखंड की बेटियों को छुडा कर वापस उनके घर पंहुचाने का काम भी कर रही है।
ashish shastri simdega 9334346611

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