मंगलवार, 3 मई 2011

माओवादी विकास के बाधक



झारखंड में लाल आतंक का रूप धारण कर चुके माओवादी अब तक तो सिर्फ खाकी वर्दी को हीं अपना निशाना बना कर सरकारी तंत्र के विरूद्ध अपनी हुकुमत चलाने की कोशिश करते थे। लेकिन हाल के दिनों में माओवादियों द्वारा जिस तरह विकास कार्य में लगे कीमती मशीनों को जलाया गया है। इससे तो लगता है कि माओवादी अब क्षेत्र के विकास कार्यो के विरूद्ध भी अपनी जंग छेड चुके हैं। -

खाकी वर्दी पर छुप कर वार करने वाले माओवादी अब एक नई तरह की जंग छेड कर अपनी हुकुमत चलाने की कोशिश करने लगे है। माओवादियों ने अब क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यो में अवरूद्ध पैदा कर अपनी आटा गीली करने में लग गये हैं। माओवादियों द्वारा हाल के दिनों में दी गयी घटनाओं में गौर किया जाये तो पिछले तीन महीनों में सिर्फ सिमडेगा जिले में माओवादियों ने प्रधानमंत्री सडक ग्रामीण सडक योजना के तहत निर्माणाधीण सडकों में काम कर रहे आठ जेसीबी मशीनों को फुंक कर सडक बना रही कंस्ट्रक्शन कंपनियों को करीब चार करोड की चोट दे चुके हैं। माओवादियों ने सिमडेगा में 28 फरवरी को बानो थाना क्षेत्र के केवेटांग गांव में सडक बनवा रहे हर्श कंस्ट्रक्शन कंपनी के दो जेसीबी मशीनों को फुंक कर अपने इस जंग की शुरूआत कर दी। इसके बाद माओवादी माओवादियों ने इसी महीने के छह तारीख को बानो के हीं हाटीगंहोडे गांव में सडक बना रहे पोखर कंस्ट्रक्शन कंपनी के एक जेसीबी मषीन को फुंक डाला। माओवादी इतना के बाद भी जब क्षेत्र में चल रहे सडक निर्माण पर बे्रक नहीं लगा सके तो माओवादियों ने नौ अप्रैल की शाम कोलेबिरा थाना क्षेत्र के बंदरचुआं चैरापानी गांव में सडक बनावा रही कृश्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी के पांच जेसीबी मशीनों को फुंक कर विकास कार्यो के विरूद्ध अपनी जंग की मंशा साफ कर दी। माओवादियों ने यहां घटना को अंजाम देने के बाद एक पोस्टर भी चिपका कर विकास कार्यो में लगे ठेकेदारो और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए फरमान भी जारी कर दिया कि कामों में मशीनों का प्रयोग मत करो और मजदुरों को 122 रूपये की जगह 300 रूपये दो। नौ अप्रैल की घटना और माओवादियों के इस फरमान के बाद के बाद सिमडेगा जिला में काम करवा रहे कंस्ट्रशन कंपनी और ठेकेदारों में हडकंप मच गयी और सभी ने काम में लगे सभी मशीनों को हटवा लिया। इतना हीं नहीं माओवादियों की इस तरह बेवाक उपस्थिती और कु्रर तांडव के बाद इन विकास कार्यो में लगे ऐजेंसियों के सामने एक और समस्या आकर खडी हो गयी है। निर्माणस्थल पर रह कर काम करवाने वाले उनके कर्मी इस घटना से इतने भयभीत हो गये हैं कि वे अब निर्माणस्थल से भागने लगे हैं। जिससे विकास के कार्य बिलकुल ठप्प पड गये हैं।
पुलिस का भी मानना है कि माओवादी और विकास अब एक दुसरे के विलोम हो गये है। माओवादी अपने वर्चस्व वाले ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी तरह के विकास कार्य नहीं होने देना चाहते है। क्योकिं वे जानते हैं कि इन क्षेत्रों में विकास कार्य होगें तो इन क्षेत्रों से उनका वर्चस्व समाप्त हो जायेगा। इसलिए वे ग्रामीणों को बरगला कर विकास कार्यो में अवरूद्ध पैदा कर रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि माओवादी इस तरह आगजनी की घटना को अंजाम देकर निष्चित तौर पर इन क्षेत्रों में अपनी हुकुमत कायम रखना चाहते हैं। माओवादी सिर्फ सिमडेगा हीं नहीं बल्कि आसपास के जिलों में भी इसी तरह के घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। साथ हीं साथ माओवादी इस तरह की घटना को अंजाम देकर ठेकेदारों से मोटी लेवी लेना चाहते हैं। माओवादी ये कभी नहीं चाहते कि ग्रामीणों के पास पैसे आये। क्योकि उनके पास पैसे आयेगे तो वे विकास के साथ जुडेगे और उनका वर्चस्व खत्म हो जायेगा। माओवादी जिस काम को हाथ से करवाने के लिए अपना तुगलगी फरमान जारी किये है। वह काम हाथ से कभी नहीं हो सकता है। क्योकि ये सारे काम पहाडों और जंगलों के बीच की जा रही है। जो कि बीना मशीन के होना संभव नहीं है। पुलिस का कहना है कि माओवादीयों के खिलाफ पुलिस लगातार अपना अभियान चला रही है।




ashish shastri simdega 9334346611

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