रविवार, 15 मई 2011

सिमकार्ड का गोरखधंधा



व्यापारियों और ठेकेदारों से पैसे और लेवी वसुलने के लिए अपराधियों और उग्रवादियों के लिए आज सबसे आसान हथियार मोबाईल हो गया है। अपने शिकार का भयादोहन करने के लिए सबसे पहले उन्हे मोबाईल पर हीं धमकी दी जाती है। लेकिन आज धडल्ले से बिना नाम और पता की तहकीकात किये हुए कुछ दुकानदारों द्वारा मोबाईल में लगने वाले सिमकार्ड बेचे जाने के कारण पुलिस के लिए असली अपराधियों और उग्रवादियों तक पंहुचना टेढी खीर बनता जा रहा है। एक रिर्पोट

.आम आदमियों तक मोबाईल की सुविधा पंहुचाने के लिए संचार क्षेत्र से जुडी कंपनियों द्वारा अपने उत्पादों को ज्यादा बेचने के लिए दिन प्रतिदिन नये और आर्कषक आॅफर दिये जा रहे हैं। कभी मोबाईल की सिम लेने के लिए कई दिनों तक की मशक्कत करने की जरूरत पडती थी। लेकिन अब छोटे दुकानों में भी पांच मिनट में ये सिम आसानी से मिल जाते हैं। इसके लिए दुकानदारों द्वारा तो सिम लेने वाले के नाम एंव पता की तहकीकात की जाती है और ना हीं उसके फोटो का मिलान किया जाता है। जबकि सिम लेने के लिए नियम काफी कडे है और दुकानदारों को इनका पालन करने का आदेश भी है।


.बावजुद इसके कुछ दुकानदार अधिक लाभ के चक्कर में सभी नियमो को ताक पर रख कर अवैध तरीके से सिम का धंधा खुलेआम चला रहे हैं। इसका फायदा मौजुदा दौर में अपराधी और उग्रवादी बेखौफ होकर उठा रहे हैं। पुलिस द्वारा हाल के दिनों में गिरफ्तार किये गये हर अपराधी और उग्रवादी के पास से आधे दर्जन से ज्यादा मोबाईल और सिम मिलना आम बात हो गयी है। पिछले छह माह में गिरफ्तार किये गये इन लोगों से पुलिस को सौ से ज्यादा सिम और दर्जनों मोबाईल मिले हैं। इनमें से अधिकांश सिम दुसरे जिले और राज्य के पते से लिये गये थे। पुलिस जब इनकी तहकीकात शुरू की तब उसमें से अधिकांश सिम फर्जी पाये गये। पुलिस भविष्य में इस तरह के सिम के  गोरखधंधे को रोकने की तैयारी में जुट गयी है।


.पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है। क्योकिं अपराधी और उग्रवादी किसी भी सिम को बहुत थोडे समय के लिए इस्तेमाल करते हैं और पुलिस जब तक उनके सिम के नम्बर की जांच करती है। तब तक वे पुराना सिम को नष्ट कर चुके होते हैं। इससे पुलिस का काम लगातार दुरूह होता जा रहा है। अब पुलिस ऐसे दुकानदार पर नकेल कसने की तैयारी में है जो इस तरह के सिम बेचा करते है। पुलिस का मानना है कि यह रैकेट बहुत बडा है और ऐसे अपराधी और उग्रवादी दुकानदारों के मिली भगत से मृत व्यक्ति के पहचान पत्र का उपयोग कर सिमकार्ड आसानी से ले लेते हैं। पुलिस अब ऐसे दुकानदारों को चिन्हीत कर उन पर एफआइआर करने की तैयारी में है।

  
 झारखंड के अति उग्रवाद प्रभावित जिलों में से एक सिमडेगा में ठेकेदारों और बडे व्यापारियों से लेवी लेना आम बात है। कोई भी बडी योजना बिना उग्रवादियों और अपराधियों के लेवी दिये बिना शुरू होना असंभव है। ऐसे में अगर फर्जी सिम मामले में पुलिस की कार्रवाई रंग लायेगी तो लेवी मांगने की घटनाओं पर अकुंश जरूर लगेगा।


ashish shastri simdega 9334346611

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