रविवार, 15 मई 2011

उग्रवादियों के भय से खाली हुआ गांव




उग्रवादियों का भय क्या होता है यह अगर जानना है तो सिमडेगा के बानो थाना क्षेत्र के रामजोल गांव में आकर देखें। उग्रवादियों के भय से लगभग 500 की आबादी वाले इस गांव में अब सिर्फ बुढे हीं बचे हैं। सभी युवा उग्रवादियों के भय के कारण गांव से पलायन कर चुके हैं।

गांव में मरघट सा सन्नाटा और बुढे बुजुर्गो की आंखों में खौफ आज इस गांव की हकीकत बयां कर रही है। बानो थाना परिसर से लगभग 20 किमी दुर बसा है रामजोल। यह गांव आज पुरी तरह युवा विहिन हो गया है। यहां के युवा अपने शौक से कहीं बाहर काम करने नहीं गये हैं, बल्कि मजबुरी के कारण अपने बुढे मां-बाप और बुजुर्गों को छोड कर आज उन्हे बाहर रहना पड रहा है। यह मजबुरी कुछ और नहीं बल्कि उग्रवादियों का भय है। पहाड की तलहटी पर बसा यह गांव चारों तरफ जंगलों से धिरा है। इसकी एक तरफ की सीमा जहां खंुटी के रनिया से सटी है। वहीं दुसरी तरफ इसके बगल में बसिया और कामडारा की सीमा है। यह गांव केवल उग्रवादियों का शरणस्थली के रूप में कार्य करता है, बल्कि समयसमय पर उग्रवादी अपनी संख्या बढाने के लिए गांव के युवाओं पर संगठन में शामिल होने के लिए दबाव भी बनाते हैं। लिहाजा गांव के अधिकांश युवा वर्ग गांव छोड कर अन्यत्र चले गये हैं। गांव के बहुत से बुर्जुग सालों से अपने जिगर के टुकडों को नहीं देख पाये हैं। गांव में इस मामले पर बोलने के लिए कोई ग्रामीण आसानी से तैयार नहीं होता है। लेकिन बहुत कुरेदने पर अपनी आंखों और लडखडाती जुबान से बहुत कुछ बोल देते हैं।

हालाकिं जिले के पुलिस कप्तान ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं होने की बात कहते हैं। लेकिन बानों क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधियों बढे होने की बात वह भी स्वीकार करते हैं, और इसका मुख्य कारण वहां की भौगोलिक स्थिती का होना बताते हैं। साथ हीं साथ उनका यह भी कहना है कि उनके कार्यकाल में घटनाओं में कमी हुई है और लगातार पुलिस के गष्त के कारण बानो में अपराध नियंत्रण में है। 

लेकिन दुसरी तरफ रामजोल गांव के मुखिया और प्रमुख कुछ और हीं कहना है। वे साफ तौर से स्वीकार करते हैं कि गांव में उग्रवादियों का भय पुरी तरह हावी है। जिसके कारण आज यह गांव युवा विहिन हो गया है।



ashish shastri simdega 9334346611

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