गरीबी अभिशाप होती है। इसे सिमडेगा के अनवर से बेहतर कोई नहीं समझ सकता है। पल पल मौत की तरफ जाती हुई अपनी मासुम छह वर्षीय बेटी को देख कर वह तिल तिल कर खुद जल रहा है।
ये मासुम बच्ची फहरीन है। डाक्टरों का कहना है कि इसे दिल की गंभीर बीमारी है और आॅपरेशन में डेढ लाख रूपये से ज्यादा का खर्च है। आज खेलने कुदने की उम्र में यह एक जगह बैठी अपने दिल में होने वाले दर्द से तडपती रहती है। सिमडेगा के एक साधारण से होटल में काम करने वाले अनवर को दिन भर के मजदुरी के रूप में मात्र 130 रूपये मिलता है। पांच बच्चों के इस परिवार में इस पैसे से दो जुन की रोटी का जुगाड मुश्किल से हो पाता है। अपने मासुम के इलाज के लिए डेढ लाख रूपये जुगाड करना अनवर के लिए किसी सपने को खरीदने के जैसा है। वह और उसकी पत्नी आज दर्द से तडपती अपनी बच्ची को देख कर दिन भर आंसु बहाते रहते हैं। अपनी बच्ची का इलाज न करा पाने का मलाल उन्हे अंदर अंदर कुरेदता रहता है। लेकिन अपने हालात के आगे वे आज बेबस है। आज वे हर किसी से अपनी बच्ची को बचा लेने की गुहार लगा रहे हैं।
गरीबों का हमदर्द बनने वाली इस सरकार का भी दो मुंहा चेहरा इस मामले में साफ नजर आता है। ऐसे गरीब लोगों के इलाज के लिए बीपीएल सुची में नाम होना अनिवार्य है। सुची में नाम होने पर सरकार द्वारा एैसे मरीजों को इलाज के लिए डेढ लाख रूपये मिलते हैं। लेकिन बीपीएल की सुची में जो वास्तविक गरीब हैं, उनका नाम नहीं है और पैसे वाले लोग पैरवी कर बीपीएल सुची में अपना नाम चढा कर गरीबों का हक मार रहे हैं। अगर 130 रूपये मजदुरी पाने वाला गरीब नहीं है तो कौन है। आज अनवर और उसका परिवार इसी सरकारी व्यवस्था का दंश झेल रहा है और पल पल अपनी मासुम बेटी को मौत के मुंह में जाते देख रहा है।
हालाकिं अनवर के परिवार के लिए राहत की बात यही है कि नेता उसके मासुम बच्ची की सुध लेने लगे हैं। सिमडेगा के जिला पार्षद नील जस्टीन भी अनवर जैसे लोगों का बीपीएल सुची में नाम न होने को सरकारी व्यवस्था का पंगु होना बताते हुए उसकी मासुम बच्ची का इलाज अपने स्तर पर कराने की बात कह रहे हैं।
ashish shastri simdega 9334346611

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