मंगलवार, 17 मई 2011

प्रेरणादायक किसान


किसी ने कहा है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंख से नहीं हौसलों से उडान होती है। हौसला हो मन में अगर तो रेगिस्तान में भी समंदर निकल जाता है। कुछ ऐसा हीं प्रेरणादायक कारनामा कर दिखाया है सिमडेगा के नौजवान किसानों ने।

सिमडेगा सदर प्रखंड के खुंटीटोली गांव के किसान वर्षों से अपने गांव के बगल में बहने वाली पालामाडा नदी की पानी से सिंचाई कर खेती बाडी करते रहे थे। लेकिन इस वर्ष भीषण गर्मी के कारण इस नदी की जलधारा सुख गयी, और पूरा नदी रेगिस्तान जैसा नजर आने लगा। पानी की कमी के कारण गांव के किसान मायुस हो गये। लेकिन इसी गांव के कुछ नौजवान किसानों ने इस विकट परिस्थती से घबराने की जगह अपना हौसला बुलंद कर सुखी हुई नदी का सीना चिर डाला और उसमें से जलधारा निकाल कर खेती को लहलहा दिया। आज वे इसी नदी के पानी के बदौलत धान सहित सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं।


नौजवान किसानो के इस हौसले ने बुडे किसानों में भी नई चेतना भर दी है और वे भी अब आगे बढ कर नौजवानो के दिखाये तरीके से खेती कर रहे हैं। इन किसानों का कहना है कि अगर उन्हे सरकारी सहयोग मिल जाए तो वे अपने मेहनत के बल पर और बेहतर खेती कर सकते हैं।


पंचायत चुनाव के बाद चुने गये प्रतिनिधि इन किसानो के हौसले की तरीफ तो करते हैं। लेकिन इन्हे अभी तक कोई सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिल पाने के कारण वे सरकारी तंत्र से नाराज नजर आये। इन प्रतिनिधियों का कहना है कि वे इन किसानो को प्रोत्साहित करने का प्रयास करेगें।

पानी के इस अनोखे जुगाड से आज पूरा क्षेत्र हराभरा नजर आने लगा है। ये किसान आज सुख्ी नदी में जलधारा निकाल कर जो हरियाली पैदा की है। ये निश्चित काबिले तारिफ है। आज ये किसान क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा को श्रोत बन गये हैं। अगर पानी के इस जुगाड को अन्य किसान भी अपना ले तो राज्य से सुखाड की समस्या निश्चित रूप से समाप्त हो जायेगी।



ashish shastri simdega 9334346611

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें