रविवार, 2 मई 2010

पत्रकारिता क्या है

भारत में पत्रकारिता को प्रारंभ हुए दो शताब्दियाँ बीत चुकी है। लेकिन आज भी लोगो के मन में ये सवाल उठता है की क्या है पत्रकारिता और क्या है पत्रकार। किसी घटना, कार्यक्रम,और मन के जज्बात को भाषा और लेखन कला से मूर्त रूप देना है पत्रकारिता। जो इन सब घटना,कार्यक्रम, और मन के जज्बात को भाषा और लेखन की कला से शब्दों को मूर्त रूप देता है उसे पत्रकार कहते हैं ।
जब हम अख़बार पड़ते हैं या समाचार चैनल देखते हैं तो हमारे मन में यह बोध होता है की जो काम इससे जुड़े लोग कर रहे हैं वह काम हम भी कर सकते हैं । हम भी लिख सकते हैं,हम भी खबर खोज सकते हैं। अगर आपके मन में भी ऐसा है तो आप भी बन सकते हैं पत्रकार। क्योंकि पत्रकार वही होता है जिसमे खबर की भूख हो। क्योंकि पत्रकार वही होता है जो सुचना की पुष्टि कर के हीं दम लेता हैऔर यह तब हीं संभो है जब आपके भीतर खबर तलाशने की भूख और जूनून हो।
पत्रकारिता महज एक समाचार लिखने तक हीं सिमित नहीं है। पत्रकारिता के कुछ कर्तब्य भी हैं जिनका निर्वहन करना अवश्यक है । भारत के लोकतंत्र के चार आधार हैं। सरकार , बिपक्छ , न्यायपालिका और पत्रकारिता । इस लिए पत्रकार को फूंक फूंक कर कदम रखना चाहिए । कंही जरा सी चुक हुई तो देश और समाज पर खतरा आ सकता है । तलवार और पैसा कलम के दुश्मन होते हैं .इस लिए पत्रकार को चाहिए की सम्मान की रक्छा के लिए जीवन और धन की बलि भी देनी पड़े तो हंस कर दे दें । तब हीं पत्रकारिता सार्थक होगा।

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