लोकतंत्र क्या है राजतंत्र या फिर जोड़तंत्र ? राजनीती के वर्तमान हालात ने ये एक ऐसा सवाल पैदा कर दिया है जिसका जवाब आज राजनीती के बड़े से बड़े सुरमा भी नहीं दे सकते हैं. क्यों की यही राजनेता आज सता की कुर्सी के लोभ में जोड़तंत्र की राजनीती को बढावा दे कर प्रतिदिन लोकतंत्र का बलात्कार कर रहे हैं. लोकतंत्र के सबसे बुरे हालात तो झारखण्ड के राजनीती के ठेकेदारों ने बना दिया है. मधु कोड़ा हो या एनोस एक्का सभी ने सोने की चिड़ियाँ रूपी झारखण्ड को लुट कर इस राज्य को किसी बदनाम गलियारे में ला कर खड़ा कर दिया है. इन नेता रूपी ठेकेदारों या फिर कें लुटेरों ने. एक जमाना था जब गाँधी, नेहरु, जैसे नेता भारत की राजनीती के सम्राट हुआ करते थे . उस वक्त राजनीती समाज के हित में देश चलाने के लिए की जाती थी. लेकिन वक्त के साथ साथ राजनीती के मायने भी बदलते चले गए और उसकी परिभाषा भी बदल गई. तब राजनीती सेवा का धर्म था. मगर आज राजनीती लुट खसोट और लालच का धर्म बन गया है. लालच आज सबसे बड़ा और सबसे पवित्र धर्म बन गया है.
आज देस के कर्णधार कहे जाने वालों में शर्म नाम की कोई चीज हीं नहीं रह गई है. आज देस के शहीदों को मिलने वाले सहायता में भी अफसर शाह और सताधारियों की नज़र गाड़ी रहती है. लाशों को मिलने वाली सहायता से भी ये गीदड़ बोटियाँ नोचने से नहीं चुकते हैं. और ये करना ये अपने धर्म मानते हैं.
लालच हमेशा पाखंड के परदे के पीछे पनपता है. लोकतंत्र में पाखंड एक बड़ा प्रलोभन है, क्योंकि समझौते हमेसा सेवा के नाम पर हीं शुरु होती है. चाहे वह देस सेवा के नाम पर या फिर समाज सेवा के नाम पर लेकिन हर बार समझौते के नाम पर ठगी तो गरीब जनता हीं जाती है.
आज हमारे देश और खास कर हमारे झारखण्ड को इंतजार है तो बस एक राम रूपी राजा की जो इसे फिर से इसे सोने की चिड़ियाँ बना दे.
ashish shastri simdega 9334346611
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