![]() |
| झारखण्ड की माटी में नाचते पेड़ |
सिमडेगा की माटी में पाई जाने वाली राटा नृत्य का भी अपना अलग महत्व है . खुद से बांस की बाध्य यन्त्र बना कर उसे बजाते हुए उसकी धुन पर नृत्य करना अपने आप में अनोखा कला है. इसी तरह चोपलों में की जाने वाली पैका नृत्य की भी अपनी अलग छवि है . अंगिका अभिनय में यह शैली सभी झारखंडी शैली की समायोजन के जैसे है.
वंही झारखण्ड के दक्छिनी छोटानागपुर सिनगी दई और कयेली दई की स्मृति में उराँव् समाज में जनि शिकार का उत्सवा मनाया जाता है. इसमें उराँव् स्त्रियाँ पुरुष वेश में शिकार करने निकलती हैं. इस शिकार में दुश्मनी का प्रतिक मने जाने वाले वन पशु मारे जाते हैं.
झारखण्ड में मुर्गा लड़ाई को पुरातन संस्कृति धरोहर के रूप में दर्जा प्राप्त है. यंहा के ग्रामीण इलाकों में शायद हीं कोई ऐसा घर होगा जो इस खेल में रूचि नहीं रखता हो. अगहन संक्रांति के प्रारंभ होते हैं सम्पूर्ण इलाके में यह परम्परागत खेल प्रारंभ हो जाता है.
ashish shastri simdega ९३३४३४६६११

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें