बुधवार, 6 अप्रैल 2011

गरीबों के घर में ग्रहण



सरकार भले ही हर वक्त गरीबों के हित की बात है। लेकिन अफसरों की लाल फिताशाही केकारण ये योजनाऐं कैसे दम तोडती हैं। यह सिमडेगा में गरीबों के लिए आशियाना मुहैया करानेकी अंबेदकर आवास योजना की हकीकत बखुबी बयां कर रही है।

गरीब बेघरों को छत मुहैया कराने के लिए सरकार की अंबेदकर आवास योजना 2004 में आयीथी। इसमें सिमडेगा में 150 दलित परिवारों के लिए 60 लाख रूपये आये थे। लेकिन सरकारीलालफिता शाही के कारण शुरू के चार वर्षो में इस योजना पर ध्यान हीं नहीं दिया गया। फिर2008 में नगर पंचायत के चुनावों के बाद वार्ड पार्षदों की पहल के बाद लाभुकों को पहली किस्तऔर प्रस्तावित आवास का एक नक्शा थमा दिया गया। लाभुकों ने काम करना तो शुरू कियालेकिन इन चार वर्षो में लागत राशि काफी बढ जाने के कारण काम अधुरा हीं पडा रहा।  तोविभाग के कोई इंजिनियर और ना हीं किसी अधिकारी ने इनकी सुध ली। कुछ लाभुकों ने जैसेतैसे अपनी बनायी हुई दीवारों पर खपडा और अन्य साधनों से छत तो बना लिया लेकिन अबविभाग के इंजिनियर ने घर को माॅडल के अनुसार नहीं बने रहने के कारण अगले किस्त काभुगतान रोक दिया है। अब गरीब जाये तो जायें कहां।

जहां नगर पंचायत के उपाध्यक्ष मामले का पुरा दोष इंजिनियर के मत्थे मढ रहे हैं। वहीं विभागके इंजिनियर गरीबों के साथ हो रहे इस मजाक को बिल्कुल हल्के ढंग से ले रहे हैं। लगातारभवन सामग्रियों के दाम में हो रही वृधि को देखते हुए अगर जल्द हीं इन गरीबों की सुध नहीं लीगयी तो शायद इन गरीबों का अपने आशियाना का सपना सपना हीं रह जायेगा।




ashish shastri simdega 9334346611

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