रविवार, 15 मई 2011

मासुम पर गरीबी का कहर




गरीबी अभिशाप होती है। इसे सिमडेगा के अनवर से बेहतर कोई नहीं समझ सकता है। पल पल मौत की तरफ जाती हुई अपनी मासुम छह वर्षीय बेटी को देख कर वह तिल तिल कर खुद जल रहा है।

ये मासुम बच्ची फहरीन है। डाक्टरों का कहना है कि इसे दिल की गंभीर बीमारी है और आॅपरेशन में डेढ लाख रूपये से ज्यादा का खर्च है। आज खेलने कुदने की उम्र में यह एक जगह बैठी अपने दिल में होने वाले दर्द से तडपती रहती है। सिमडेगा के एक साधारण से होटल में काम करने वाले अनवर को दिन भर के मजदुरी के रूप में मात्र 130 रूपये मिलता है। पांच बच्चों के इस परिवार में इस पैसे से दो जुन की रोटी का जुगाड मुश्किल से हो पाता है। अपने मासुम के इलाज के लिए डेढ लाख रूपये जुगाड करना अनवर के लिए किसी सपने को खरीदने के जैसा है। वह  और उसकी पत्नी आज दर्द से तडपती अपनी बच्ची को देख कर दिन भर आंसु बहाते रहते हैं। अपनी बच्ची का इलाज करा पाने का मलाल उन्हे अंदर अंदर कुरेदता रहता है। लेकिन अपने हालात के आगे वे आज बेबस है। आज वे हर किसी से अपनी बच्ची को बचा लेने की गुहार लगा रहे हैं।

गरीबों का हमदर्द बनने वाली इस सरकार का भी दो मुंहा चेहरा इस मामले में साफ नजर आता है। ऐसे गरीब लोगों के इलाज के लिए बीपीएल सुची में नाम होना अनिवार्य है। सुची में नाम होने पर सरकार द्वारा एैसे मरीजों को इलाज के लिए डेढ लाख रूपये मिलते हैं। लेकिन बीपीएल की सुची में जो वास्तविक गरीब हैं, उनका नाम नहीं है और पैसे वाले लोग पैरवी कर बीपीएल सुची में अपना नाम चढा कर गरीबों का हक मार रहे हैं। अगर 130 रूपये मजदुरी पाने वाला गरीब नहीं है तो कौन है। आज अनवर और उसका परिवार इसी सरकारी व्यवस्था का दंश झेल रहा है और पल पल अपनी मासुम बेटी को मौत के मुंह में जाते देख रहा है।

हालाकिं अनवर के परिवार के लिए राहत की बात यही है कि नेता उसके मासुम बच्ची की सुध लेने लगे हैं। सिमडेगा के जिला पार्षद नील जस्टीन भी अनवर जैसे लोगों का बीपीएल सुची में नाम होने को सरकारी व्यवस्था का पंगु होना बताते हुए उसकी मासुम बच्ची का इलाज अपने स्तर पर कराने की बात कह रहे हैं।


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उग्रवादियों के भय से खाली हुआ गांव




उग्रवादियों का भय क्या होता है यह अगर जानना है तो सिमडेगा के बानो थाना क्षेत्र के रामजोल गांव में आकर देखें। उग्रवादियों के भय से लगभग 500 की आबादी वाले इस गांव में अब सिर्फ बुढे हीं बचे हैं। सभी युवा उग्रवादियों के भय के कारण गांव से पलायन कर चुके हैं।

गांव में मरघट सा सन्नाटा और बुढे बुजुर्गो की आंखों में खौफ आज इस गांव की हकीकत बयां कर रही है। बानो थाना परिसर से लगभग 20 किमी दुर बसा है रामजोल। यह गांव आज पुरी तरह युवा विहिन हो गया है। यहां के युवा अपने शौक से कहीं बाहर काम करने नहीं गये हैं, बल्कि मजबुरी के कारण अपने बुढे मां-बाप और बुजुर्गों को छोड कर आज उन्हे बाहर रहना पड रहा है। यह मजबुरी कुछ और नहीं बल्कि उग्रवादियों का भय है। पहाड की तलहटी पर बसा यह गांव चारों तरफ जंगलों से धिरा है। इसकी एक तरफ की सीमा जहां खंुटी के रनिया से सटी है। वहीं दुसरी तरफ इसके बगल में बसिया और कामडारा की सीमा है। यह गांव केवल उग्रवादियों का शरणस्थली के रूप में कार्य करता है, बल्कि समयसमय पर उग्रवादी अपनी संख्या बढाने के लिए गांव के युवाओं पर संगठन में शामिल होने के लिए दबाव भी बनाते हैं। लिहाजा गांव के अधिकांश युवा वर्ग गांव छोड कर अन्यत्र चले गये हैं। गांव के बहुत से बुर्जुग सालों से अपने जिगर के टुकडों को नहीं देख पाये हैं। गांव में इस मामले पर बोलने के लिए कोई ग्रामीण आसानी से तैयार नहीं होता है। लेकिन बहुत कुरेदने पर अपनी आंखों और लडखडाती जुबान से बहुत कुछ बोल देते हैं।

हालाकिं जिले के पुलिस कप्तान ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं होने की बात कहते हैं। लेकिन बानों क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधियों बढे होने की बात वह भी स्वीकार करते हैं, और इसका मुख्य कारण वहां की भौगोलिक स्थिती का होना बताते हैं। साथ हीं साथ उनका यह भी कहना है कि उनके कार्यकाल में घटनाओं में कमी हुई है और लगातार पुलिस के गष्त के कारण बानो में अपराध नियंत्रण में है। 

लेकिन दुसरी तरफ रामजोल गांव के मुखिया और प्रमुख कुछ और हीं कहना है। वे साफ तौर से स्वीकार करते हैं कि गांव में उग्रवादियों का भय पुरी तरह हावी है। जिसके कारण आज यह गांव युवा विहिन हो गया है।



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सिमकार्ड का गोरखधंधा



व्यापारियों और ठेकेदारों से पैसे और लेवी वसुलने के लिए अपराधियों और उग्रवादियों के लिए आज सबसे आसान हथियार मोबाईल हो गया है। अपने शिकार का भयादोहन करने के लिए सबसे पहले उन्हे मोबाईल पर हीं धमकी दी जाती है। लेकिन आज धडल्ले से बिना नाम और पता की तहकीकात किये हुए कुछ दुकानदारों द्वारा मोबाईल में लगने वाले सिमकार्ड बेचे जाने के कारण पुलिस के लिए असली अपराधियों और उग्रवादियों तक पंहुचना टेढी खीर बनता जा रहा है। एक रिर्पोट

.आम आदमियों तक मोबाईल की सुविधा पंहुचाने के लिए संचार क्षेत्र से जुडी कंपनियों द्वारा अपने उत्पादों को ज्यादा बेचने के लिए दिन प्रतिदिन नये और आर्कषक आॅफर दिये जा रहे हैं। कभी मोबाईल की सिम लेने के लिए कई दिनों तक की मशक्कत करने की जरूरत पडती थी। लेकिन अब छोटे दुकानों में भी पांच मिनट में ये सिम आसानी से मिल जाते हैं। इसके लिए दुकानदारों द्वारा तो सिम लेने वाले के नाम एंव पता की तहकीकात की जाती है और ना हीं उसके फोटो का मिलान किया जाता है। जबकि सिम लेने के लिए नियम काफी कडे है और दुकानदारों को इनका पालन करने का आदेश भी है।


.बावजुद इसके कुछ दुकानदार अधिक लाभ के चक्कर में सभी नियमो को ताक पर रख कर अवैध तरीके से सिम का धंधा खुलेआम चला रहे हैं। इसका फायदा मौजुदा दौर में अपराधी और उग्रवादी बेखौफ होकर उठा रहे हैं। पुलिस द्वारा हाल के दिनों में गिरफ्तार किये गये हर अपराधी और उग्रवादी के पास से आधे दर्जन से ज्यादा मोबाईल और सिम मिलना आम बात हो गयी है। पिछले छह माह में गिरफ्तार किये गये इन लोगों से पुलिस को सौ से ज्यादा सिम और दर्जनों मोबाईल मिले हैं। इनमें से अधिकांश सिम दुसरे जिले और राज्य के पते से लिये गये थे। पुलिस जब इनकी तहकीकात शुरू की तब उसमें से अधिकांश सिम फर्जी पाये गये। पुलिस भविष्य में इस तरह के सिम के  गोरखधंधे को रोकने की तैयारी में जुट गयी है।


.पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है। क्योकिं अपराधी और उग्रवादी किसी भी सिम को बहुत थोडे समय के लिए इस्तेमाल करते हैं और पुलिस जब तक उनके सिम के नम्बर की जांच करती है। तब तक वे पुराना सिम को नष्ट कर चुके होते हैं। इससे पुलिस का काम लगातार दुरूह होता जा रहा है। अब पुलिस ऐसे दुकानदार पर नकेल कसने की तैयारी में है जो इस तरह के सिम बेचा करते है। पुलिस का मानना है कि यह रैकेट बहुत बडा है और ऐसे अपराधी और उग्रवादी दुकानदारों के मिली भगत से मृत व्यक्ति के पहचान पत्र का उपयोग कर सिमकार्ड आसानी से ले लेते हैं। पुलिस अब ऐसे दुकानदारों को चिन्हीत कर उन पर एफआइआर करने की तैयारी में है।

  
 झारखंड के अति उग्रवाद प्रभावित जिलों में से एक सिमडेगा में ठेकेदारों और बडे व्यापारियों से लेवी लेना आम बात है। कोई भी बडी योजना बिना उग्रवादियों और अपराधियों के लेवी दिये बिना शुरू होना असंभव है। ऐसे में अगर फर्जी सिम मामले में पुलिस की कार्रवाई रंग लायेगी तो लेवी मांगने की घटनाओं पर अकुंश जरूर लगेगा।


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कलयुग का भगीरथ




मई माह की शुरूआत से हीं गर्मी अपना कहर बरपाने लगी है। एैसे में लोगों के सामने पानी की समस्या खडी हो गयी है। लेकिन लोगों की एैसी समस्या को देखते हुए सिमडेगा की एक स्वयंसेवी संस्था आज लोगो के लिए भगीरथ बन कर इन्हे पानी की समस्या से निजाद दिला रही है। आइये आपको भी मिलवाते हैं कलयुग के इस भगीरथ से जो बिना किसी स्वार्थ के लोगो को पानी मुहैया कराने में जुटा है।

सिमडेगा में चारों तरफ सुरज आग बरसा रहा है। तापमान 42 डिग्री पार कर चुका है और जिले के अधिकांश कुंए और तालाब सुख चुके हैं। सुरज के तपन के आगे क्षेत्र में लगे अधिकांश चापानल भी अपना दम तोड चुके हैं। ऐसे में लोगों के सामने पीने के पानी की समस्या सुरसा के जैसी मंुह फाडे खडी हो गयी है। लोग काफी दुर दुर भटक कर पीने के लिए पानी की जुगाड करने में लगे हैं। लोगो की इस समस्या को देखते हुए स्वयंसेवी संस्था नगर अपना सिमडेगा के ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को पारंपरिक और प्राकृतिक तरीके से पानी मुहैया कराने में जुटा है। नगर अपना के संचालक चंदन डे जो एक सेवानिवृत सैनिक हैं। वे आपने संस्था के स्वयंसेवक साथ मिल कर गांव में जाकर वहां के खेतों के किनारे दम तोड चुके चुआंडी (डांडी-खेतों के किनारे बना प्राकृतिक कुंआ) को जिर्णोधार कर उसे एक कुंए का रूप दे रहे हैं। खेतों में बने इन चुआंडियों की सबसे बडी खासियत यह होती है कि यह मात्र 10 फिट गहरा होता है। लेकिन इतने कम गहराई के बावजुद खेतों की नमी के कारण इनमें पानी भरपुर होता है। जो कि गर्मी के दिनों में भी नहीं सुखता है। एक चुआंडी से करीब 150 परिवारों को पानी मिल जाता है। आज यह चुआंडी लोगों के लिए वरदान से कम नहीं है। आज लोग चुआंडी के बन जाने से काफी खुश हैं।


नगर अपना संस्था के संचालक चंदन डे अभी तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आधे दर्जन से अधिक चुआंडी बना चुके हैं। चंदन डे के अनुसार उनकी संस्था को किसी भी प्रकार का सरकारी सहायता नहीं मिलता है। बावजुद इसके वे लोगो के श्रमदान के बदौलत बहुत कम लागत में लोगों के लिए चुआंडी का निर्माण करते हैं। चंदन डे ने बताया कि वे बहुत जल्द और तीन चुआंडी का निर्माण करने वाले हैं।


आज हर तरफ पानी के लिए हाहाकार मचा है। डीप बोरिंग भी फेल करने लगे है। एैसे में कलयुग के इस भगीरथ की कम लगात से बनने वाली इस चुआंडी वाली योजना को अगर सरकार वृहत रूप में चलाये तो निष्चित तौर पर लोगों के सामने से पानी की समस्या खत्म हो जायेगी।


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